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मेरी कविताएं...
This blog is a collection of my poems
Tuesday, December 22, 2009
क्या कुदरत की यही रज़ा है,
या मेरे किसी गुनाह की सजा है?
के जब लगा हमें मिल गया किनारा,
तभी बदकिस्मती ने सीने में खंजर है उतारा...
Friday, December 4, 2009
ज़िन्दगी ये किस मोड़ पर ले आई है,
जहाँ शाम-ओ-सहर सिर्फ़ एक तनहाई है,
तुझसे एक यार ही तो माँगा था ऐ रब,
उसी में तुने मुझे दी उम्र भर की रुसवाई है??
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कविता का शीर्षक है:जब याद तुम्हारी आती है
शीर्षक रहित
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Niks
Understanding the world in general & corporate in particular. तेरे जहाँ में ऐसा नहीं कि प्यार न हो, जहाँ उम्मीद हो इसकी, वहाँ नहीं मिलता, कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता, कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता|
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