धनतेरस पे धन बरसे, दीपावली पे प्रकाश,
लक्ष्मी गणेश की कृपा हो तुम पर, मेरी यही अभिलाष
Sunday, October 26, 2008
Saturday, October 25, 2008
Sunday, September 28, 2008
आओ बैठें, कुछ बात करें!
ज़िन्दगी के झमेलों से,
दुनिया के मेलो से,
इन सभी रेलों से दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
रोज़ी के ख्यालों से,
रोटी के सवालो से,
पैसे की इन टकसालों से दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
शहर की इस भीड़ से,
ईंटों के इस नीड़ से,
गाडियों के इस शोर से कहीं दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
बोहोत दिन हुए हमें आए,
शायद ही हम कभी करीब आए,
इन दीवारों से कहीं दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
दुनिया के मेलो से,
इन सभी रेलों से दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
रोज़ी के ख्यालों से,
रोटी के सवालो से,
पैसे की इन टकसालों से दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
शहर की इस भीड़ से,
ईंटों के इस नीड़ से,
गाडियों के इस शोर से कहीं दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
बोहोत दिन हुए हमें आए,
शायद ही हम कभी करीब आए,
इन दीवारों से कहीं दूर,
आओ बैठें, कुछ बात करें!
दिल करता है..
तेरे नैनो के इस सागर में,
डूब जाने को दिल करता है!
तेरे होठो की इस गागर से,
प्यास बुझाने को दिल करता है!
तेरे केशो की इस रजनी में,
गुम हो जाने को दिल करता है!
तेरे चेहरे के इस नरमी को,
छू जाने को दिल करता है!
तेरी बाहों के इस बंधन में,
समाने को दिल करता है!
बस इतना जान ले तू,
के तुझे अपना बनाने को दिल करता है!
डूब जाने को दिल करता है!
तेरे होठो की इस गागर से,
प्यास बुझाने को दिल करता है!
तेरे केशो की इस रजनी में,
गुम हो जाने को दिल करता है!
तेरे चेहरे के इस नरमी को,
छू जाने को दिल करता है!
तेरी बाहों के इस बंधन में,
समाने को दिल करता है!
बस इतना जान ले तू,
के तुझे अपना बनाने को दिल करता है!
मेरी चाहत...
कभी बैठे हुए अकेले में,
तेरी यादों के मेले में,
आँख भर आती है,
दिल सूना कर जाती है!
शायद वो दिन भले ही थे,
जब तुम हम अभी मिले नहीं थे,
तब शायद तुम अहम् नहीं थे,
तब तुममें कोई अहम् नहीं था!
पर अब कैसे बताऊँ तुम्हे,
किस हद तक अब चाहूं तुम्हे,
समझ नहीं मैं पाता हूँ,
कैसे कहू, के तुम्हे कितना चाहता हूँ!!
दिल में अब एक चाहत ही है,
तुमको पाने की ख्वाहिश ही है,
इस दिल की चाहत तुम समझो,
बन के बदरा मुझ पर बरसो!
तेरी यादों के मेले में,
आँख भर आती है,
दिल सूना कर जाती है!
शायद वो दिन भले ही थे,
जब तुम हम अभी मिले नहीं थे,
तब शायद तुम अहम् नहीं थे,
तब तुममें कोई अहम् नहीं था!
पर अब कैसे बताऊँ तुम्हे,
किस हद तक अब चाहूं तुम्हे,
समझ नहीं मैं पाता हूँ,
कैसे कहू, के तुम्हे कितना चाहता हूँ!!
दिल में अब एक चाहत ही है,
तुमको पाने की ख्वाहिश ही है,
इस दिल की चाहत तुम समझो,
बन के बदरा मुझ पर बरसो!
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